Saturday, September 20, 2025

12th Economics Chapter 3 imp QA

 









Class-12 Economics

Chapter- 3 (उत्पादन तथा लागत)


 



अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

 

प्रश्न 1. कौनसा लागत वक्र आयताकार अतिपरवलय आकृति का होता है?
उत्तर:
औसत स्थिर लागत वक्र (AFC वक्र) आयताकार अतिपरवलय आकृति का होता है।

 

प्रश्न 2. दीर्घकाल से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वह समयावधि जिसमें उत्पादन के सभी कारकों में परिवर्तन लाया जा सकता है।

 

प्रश्न 3. अल्पकाल क्या है?
उत्तर:
वह अवधि जिसमें उत्पादक केवल परिवर्ती कारकों में परिवर्तन कर सकता है। 

 

प्रश्न 4. उत्पादन फलन क्या है? 
अथवा 
उत्पादन फलन से क्या तात्पर्य है?
अथवा 
उत्पादन फलन की संकल्पना को समझाइये।
उत्तर:
फर्म द्वारा उपयोग में लाए गए आगतों तथा फर्म द्वारा उत्पादित निर्गतों के मध्य का सम्बन्ध है।

 

प्रश्न 5. उत्पादन कारक का आशय लिखिए।
उत्तर:
जिनकी सहायता से उत्पादन किया जाता हैजैसे - भूमिपूँजीश्रम आदि।

 

प्रश्न 6. अर्थशास्त्र में लागत का क्या अर्थ है?
उत्तर:
उत्पादन हेतु साधनों पर किया गया व्यय लागत है।

 

प्रश्न 7. परिवर्तनशील साधन से आप क्या समझते
उत्तर:
जिन साधनों में अल्पकाल में परिवर्तन किया जा सकता है।

 

प्रश्न 8. स्थिर लागतों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
उत्पादन के स्थिर साधनों पर किया गया व्यय स्थिर लागत है।

 

प्रश्न 9. परिवर्तनशील लागतों से क्या आशय है?
उत्तर:
उत्पादन के परिवर्तनशील साधनों पर किया गया व्यय परिवर्तनशील लागत है।

 

प्रश्न 10. उत्पादन फलन किनके मध्य सम्बन्ध बताता है?
उत्तर:
यह आगतों एवं निर्गत के मध्य सम्बन्ध बताता है।

 

प्रश्न 11. वह कौनसी आगत है जिसमें अल्पकाल में कोई परिवर्तन नहीं होता है?
उत्तर:
स्थिर आगत।

प्रश्न 12. वह कौनसी आगत है जिसमें अल्पकाल में परिवर्तन किया जा सकता है?
उत्तर:
परिवर्ती आगत।

 

प्रश्न 13. सीमान्त उत्पाद की आकृति किस प्रकार की होती है?
उत्तर:
उल्टे 'U' के समान।

 

प्रश्न 14. सीमान्त उत्पाद वक्रऔसत उत्पाद वक्र  को किस बिन्दु पर काटता है?
उत्तर:
जहाँ औसत उत्पाद अधिकतम होता है।

 

प्रश्न 15. जब सभी आगतों के अनुपातों में वृद्धि  के फलस्वरूप निर्गत में भी उसी अनुपात में वृद्धि होती हैऐसे पैमाना का प्रतिफल को क्या कहा जाता है?  
उत्तर:
पैमाना का स्थिर प्रतिफल।

 

प्रश्न 16. कॉब डगलस उत्पादन फलन का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
q = x
α1.xα2

 

प्रश्न 17. औसत स्थिर लागत दिए होने पर कुल स्थिर लागत किस प्रकार ज्ञात की जाती है?
उत्तर:
कुल स्थिर लागत = औसत स्थिर लागत x निर्गत इकाइयाँ

 

प्रश्न 18. उत्पादन फलन का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
q = f(L, K)
यहाँ q = उत्पादन मात्रा, L = श्रम व K = पूँजी की मात्रा 

 

प्रश्न 19. समोत्पाद वक्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
समोत्पाद वक्र दो उत्पादन साधनों के उन विभिन्न संयोगों को दर्शाता है जिनसे समान मात्रा में उत्पादन प्राप्त होता है।

 

 

प्रश्न 21. स्थिर आगत किसे कहते हैं?
उत्तर:
अल्पकाल में एक फर्म जिन आगतों में परिवर्तन नहीं कर सकती हैउन्हें स्थिर आगत कहते हैं। 

 

प्रश्न 22. परिवर्ती आगत किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक फर्म अल्पकाल में जिन आगतों में परिवर्तन ला सकती है उन्हें परिवर्ती आगत कहते हैं।

 

प्रश्न 23. सीमान्त उत्पाद किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रति इकाई आगत में परिवर्तन के कारणकुल निर्गत में जो परिवर्तन होता हैउसे सीमान्त उत्पाद कहते हैं। 

 

प्रश्न 25. औसत उत्पाद किसे कहते हैं?
उत्तर:
कुल उत्पादन में आगतों की इकाइयों का भाग देने से प्राप्त उत्पाद औसत उत्पाद कहलाता है। 

 

प्रश्न 27. समोत्पाद वक्र की कोई एक विशेषता बताइए।
उत्तर:
दीर्घकालीन उत्पादन फलन को पैमाना का प्रतिफल कहते हैं।

 

प्रश्न 29. औसत उत्पाद वक्र तथा सीमान्त उत्पाद वक्र का आकार किस प्रकार का होता है?
उत्तर:
औसत उत्पाद वक्र तथा सीमान्त उत्पाद वक्र का आकार उल्टे 'U' अर्थात् '0' के समान होता है।

 

प्रश्न 30. पैमाने के प्रतिफल के प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

     स्थिर पैमाने के प्रतिफल 

     वर्धमान पैमाने के प्रतिफल 

     ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल। 

 

 

प्रश्न 33. सीमान्त लागत किसे कहते हैं?
उत्तर:
उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने से कुल लागत में जो वृद्धि होती है उसे सीमान्त लागत कहते हैं। 

 

प्रश्न 35. औसत परिवर्ती लागत वक्र तथा औसत लागत वक्र का आकार कैसा होता है?
उत्तर:
औसत परिवर्ती लागत वक्र तथा औसत लागत वक्र का आकार 'U' के समान होता है।

 

प्रश्न 36. दीर्घकालीन औसत लागत वक्र का आकार कैसा होता है?
उत्तर:
दीर्घकालीन औसत लागत वक्र का आकार 'U' के समान होता है।

 

प्रश्न 37. औसत स्थिर लागत वक्र का आकार किस प्रकार का होता है?
उत्तर:
औसत स्थिर लागत वक्र का आकार दायीं तरफ से बायीं तरफ नीचे गिरता हुआ होता है।

 

प्रश्न 38. अल्पकाल में उत्पादन की मात्रा में वृद्धि होने पर कुल स्थिर लागत में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
इसका स्थिर लागतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

 

प्रश्न 39. अल्पकाल में कोई दो परिवर्ती आगतों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

श्रमिकों की मजदूरी 

कच्चे माल का मूल्य।

 

प्रश्न 40. समय के आधार पर उत्पादन फलन के प्रकार बताइए।
उत्तर:

अल्पकालीन उत्पादन फलन 

दीर्घकालीन उत्पादन फलन।

 

 

 

 

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

 

प्रश्न 1. 'पैमाने के प्रतिफलकी अवधारणा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दीर्घकाल में उत्पत्ति के साधनों में समान अनुपात में परिवर्तन करने से उत्पत्ति पर जो प्रभाव पड़ता हैउसे 'पैमाने के प्रतिफलकहा जाता है।

 

प्रश्न 2. अल्पकाल से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अल्पकाल का अभिप्राय उस समय अवधि से है जिसमें उत्पादक उत्पादन के केवल परिवर्ती आगतों में ही परिवर्तन कर सकता है।

 

प्रश्न 3. दीर्घकाल से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दीर्घकाल से अभिप्राय उस समय अवधि से है जिसमें उत्पादकउत्पादन के सभी साधनों में परिवर्तन कर सकता है।

 

प्रश्न 4. फर्म उत्पादन साधनों के किस संयोग बिन्दु पर साम्य में होगी?
उत्तर:
एक फर्म उस संयोग बिन्दु पर साम्य में होगी जहाँ पर समोत्पाद वक्र एवं समलागत रेखा का ढाल समान या बराबर होता है।

 

प्रश्न 5. उत्पादन आगतों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उत्पादन आगत उत्पादन के वे साधन हैं जिनके सहयोग से एक उत्पादक उत्पादन करता हैजैसेश्रमभूमिपूँजीमशीनेंकच्चा माल इत्यादि।

 

प्रश्न 6. स्थिर पैमाने के प्रतिफल किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब उत्पादन की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि होती है उसी अनुपात में निर्गत में वृद्धि होती है तो उसे स्थिर पैमाने के प्रतिफल कहते हैं।

 

प्रश्न 7. वर्धमान पैमाने के प्रतिफल किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब उत्पादन की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि की जाती हैनिर्गत में उससे अधिक अनुपात में वृद्धि हो तोउसे वर्धमान पैमाने के प्रतिफल कहा जाता है।

 

प्रश्न 8. ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल किसे कहते
उत्तर:
जब उत्पादन की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि की जाती है तब निर्गत में उससे कम अनुपात में वृद्धि हो तो उसे ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल कहा जाता है।

 

प्रश्न 9. कुल परिवर्तनशील लागत एवं कुल स्थिर लागत में एक अन्तर बताइए।
उत्तर:
कुल परिवर्तनशील लागत उत्पादन की मात्रा पर निर्भर करती है जबकि इसके विपरीत कुल स्थिर लागत उत्पादन मात्रा पर निर्भर नहीं करती है।

 

प्रश्न 10. परिवर्ती अनुपातों के नियम का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिवर्ती अनुपातों के नियम के अनुसार प्रारम्भ में आगतों के प्रयोग से सीमान्त उत्पादन बढ़ता है किन्तु एक स्तर के पश्चात् इसमें गिरावट आनी प्रारम्भ हो जाती

 

प्रश्न 11. औसत उत्पाद को परिभाषित कीजिए तथा इसे ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
उत्तर:
औसत उत्पाद औसत उत्पाद निर्गत की प्रति इकाई को परिवर्ती आगत के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसकी गणना निम्न प्रकार की जाती है।

 

प्रश्न 12. उत्पादक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
उत्पादक वह साहसी व्यक्ति होता है जो उत्पादन के विभिन्न साधनों अथवा आगतों का उपयोग . . करके वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करता है।

 

प्रश्न 13. उत्पादन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं एवं सेवाओं की वह मात्रा जो उत्पादक आगतों की विभिन्न मात्राओं का उपभोग कर उत्पादित करता हैउत्पादन कहलाता है।

 

 

प्रश्न 14. समान मात्रा वक्र की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
अथवा 
समोत्पाद वक्र की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

समोत्पाद वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है।

समोत्पाद वक्र अपने मूल बिन्दु की ओर उन्नतोदर होता है।

 

 

प्रश्न 15. उत्पादक के सन्तुलन की कोई दो आवश्यक शर्ते बताइए।
उत्तर:

समोत्पाद वक्र सन्तुलन बिन्दु पर समलागत रेखा को स्पर्श करना चाहिए।

सन्तुलन बिन्दु पर समोत्पाद वक्र मूल बिन्दु के प्रति उन्नतोदर होना चाहिए।

 

 

प्रश्न 16. कुल उत्पाद से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर;
एक फर्म द्वारा निश्चित समय में विभिन्न आगतों का उपयोग करके उत्पादित की जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की कुल मात्रा को कुल उत्पाद कहा जाता है।

 

 

प्रश्न 17. परिवर्ती अनुपात नियम की कोई दो मान्यताएँ बताइए।
उत्तर:

उत्पादन का एक साधन परिवर्तनशील होता है जबकि अन्य साधन स्थिर रहते हैं।

उत्पादन के साधनों के अनुपात में परिवर्तन करना संभव है।

 

 

प्रश्न 18. कुल स्थिर लागतों का अर्थ लिखिए।
उत्तर:
वे लागतें जो अल्पकाल में फर्म के शून्य उत्पादन से लेकर अधिकतम संभव उत्पादन तक स्थिर रहती हैंवह उसकी कुल स्थिर लागत कहलाती हैं।

 

 

प्रश्न 19. पैमाने के बढ़ते प्रतिफल लागू होने के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

जब अविभाज्य साधनों का पूरा प्रयोग होता है तो पैमाने के बढ़ते प्रतिफल प्राप्त होते हैं।

श्रम विभाजन के कारण कार्यकुशलता में वृद्धि होती हैजिससे पैमाने के बढ़ते प्रतिफल मिलते हैं।

 

 

प्रश्न 20. पैमाने के प्रतिफल तथा साधन के प्रतिफल में कोई एक अन्तर बताइए।
उत्तर:
पैमाने के प्रतिफल में सभी साधन परिवर्तनशील होते हैंजबकि साधन के प्रतिफल में केवल एक साधन परिवर्तनशील होता है अन्य सभी साधन स्थिर रहते हैं।

 

प्रश्न 21. विशिष्टीकरण का पैमाने के प्रतिफल पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
विशिष्टीकरण को अपनाने के फलस्वरूप साधनों की कुशलता बढ़ती है तथा लागतें घटती हैंजिसके परिणामस्वरूप पैमाने के बढ़ते प्रतिफल प्राप्त होते हैं।

 

प्रश्न 22. पैमाने के प्रतिफल के सम्बन्ध में कोई दो कथन लिखिए।
उत्तर:

पैमाने के प्रतिफल का सम्बन्ध दीर्घकाल से हैअल्पकाल से नहीं।

इसमें उत्पत्ति के सभी साधनों की मात्रा में समानुपातिक परिवर्तन किया जाता है।

 

प्रश्न 23. अल्पकालीन कुल लागत तथा औसत लागत का तात्पर्य लिखिए।
अथवा 
सीमान्त लागतकुल लागत एवं औसत लागत न क्या है?
उत्तर:
कुल लागत: किसी वस्तु की एक निश्चित । मात्रा का उत्पादन करने के लिए व्यय की गई राशिकुल लागत कहलाती है।
औसत लागत: कुल लागत में वस्तु की उत्पादित न इकाइयों का भाग देने पर प्राप्त लागतऔसत लागत कहलाती है। 
सीमान्त लागत: वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई उत्पादित करने पर कुल लागत में जो परिवर्तन होता हैवह सीमान्त लागत कहलाती है।

 

प्रश्न 24. सीमान्त उत्पादन की परिभाषा दीजिये।
अथवा 
सीमान्त उत्पादन क्या हैइसे ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
अन्य सभी आगतों के स्थिर रहने परपरिवर्ती आगत की एक अतिरिक्त इकाई प्रयुक्त करने से निर्गत में जो परिवर्तन आता हैवह सीमान्त उत्पादन कहलाता है। सीमान्त उत्पादन को निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।

 

 

प्रश्न 25. 'पैमाने के प्रतिफलएवं 'एक साधन के प्रतिफलमें अन्तर समझाइये।
अथवा 
'पैमाने के प्रतिफलएवं परिवर्ती अनुपात नियममें कोई तीन अन्तर बताइए।
उत्तर:

पैमाने के प्रतिफल दीर्घकाल में लाग होते हैं जबकि साधन के प्रतिफल अल्पकाल में लागू होते

पैमाने के प्रतिफल में सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं जबकि साधन के प्रतिफल में केवल एक साधन परिवर्तनशील होता है। 

पैमाने के प्रतिफल में साधनों में समान अनुपात में परिवर्तन होता हैजबकि साधन के प्रतिफल में साधन अनुपात में परिवर्तन हो जाता है।

 

प्रश्न 26. पैमाने के बढ़ते प्रतिफल से आप क्या समझते हैं?
अथवा 
पैमाने के बढ़ते प्रतिफल का क्या अर्थ हैपैमाने के बढ़ते प्रतिफल के कारण बताइये।
उत्तर:
जब सभी उत्पादन साधनों की मात्रा में एक निश्चित अनुपात में वृद्धि करने पर उत्पादन की मात्रा में उससे अधिक अनुपात में वृद्धि होती है तो इसे पैमाने के बढ़ते प्रतिफल कहते हैं।
पैमाने के बढ़ते प्रतिफल के मुख्य कारण:

अविभाज्य साधनों का पूर्ण प्रयोग होना।

श्रम विभाजन एवं कार्यकुशलता में वृद्धि के कारण।

विशिष्टीकरण।

 

प्रश्न 27. आन्तरिक बचतें क्या होती हैंइनके प्रकार लिखिये।
अथवा 
आन्तरिक बचतों से आप क्या समझते हैं
उत्तर:
आन्तरिक बचतें - आन्तरिक बचतें वे बचतें हैं जो

 

प्रश्न 28. एक रेखाचित्र बनाइये जिसमें पैमाने के समान प्रतिफल स्पष्ट हो रहे हों।
अथवा
पैमाने के समता प्रतिफल अथवा स्थिर पैमाने के ' प्रतिफल को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब उत्पादन प्रक्रिया में उत्पत्ति की मात्रा में ठीक उसी अनुपात में वृद्धि होती है जिस अनुपात में साधनों की मात्रा बढ़ाई जाती है तो इसे पैमाने के समान अथवा समता अथवा स्थिर प्रतिफल कहते हैं। रेखाचित्र के अनुसार जब साधन X तथा साधन Y की एक - एक इकाइयाँ थीं तो कुल उत्पादन 100 इकाइयाँ थीं और जब दोनों की इकाइयों को बढ़ाकर क्रमश: 22 अथवा 3 - 3 अथवा 4 - 4 कर दिया जाता है तो उत्पादन भी उसी अनुपात में बढ़कर 200 अथवा 300 अथवा 400 इकाइयाँ हो जाता है। प्रस्तुत रेखाचित्र में AB = BC = CD से स्पष्ट है कि उत्पादक को पैमाने के स्थिर प्रतिफल प्राप्त हो रहे हैं।

 

प्रश्न 29. पैमाने के घटते प्रतिफल को रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट करें।
अथवा 
ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल को रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब उत्पादन के साधनों में वृद्धि करने पर कुल उत्पादन में अपेक्षाकृत कम अनुपात में वृद्धि होती है तो इसे पैमाने का ह्रासमान अथवा घटता प्रतिफल कहते हैं।

 प्रस्तुत चित्र में E बिन्दु तक पैमाने के घटते हुए प्रतिफल प्राप्त हो रहे हैं क्योंकि AB दूरी से BC दूरी अधिक है। BC दूरी से CD दूरी तुलनात्मक अधिक है तथा CD से DE की दूरी और भी अधिक है। दूसरे शब्दों में, AB < BC <CD <DE हैं।

 

प्रश्न 30. पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल को समझाइये। यह नियम क्यों लागू होते हैं?
उत्तर:
जब उत्पादन में उत्पादन साधनों में की गई वृद्धि से कम अनुपात में वृद्धि होती है तो इसे पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल कहते हैं।
पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल लागू होने के कारण:

o   उत्पादन जटिलताओं में वृद्धि 

o   प्रशासनिक समस्याओं में वृद्धि

o   श्रम पर नियन्त्रण एवं समन्वय में कठिनाई 

o   संगठन की कुशलता में कमी 

o   अमितव्ययिताएँ।

 

प्रश्न 31. उत्पादन फलन से आप क्या समझते हैंअल्पकालीन उत्पादन को संक्षेप में समझाइए।
अथवा 
उत्पादन फलन क्या है?
उत्तर:
एक दी हुई तकनीकी स्थिति में किसी फर्म के उत्पादन तथा आगतों के सम्बन्ध को उत्पादन फलन कहा जाता है अर्थात् आगतों एवं उत्पादन के फलनात्मक सम्बन्ध को उत्पादन फलन कहते हैं। अल्पकालीन उत्पादन में अन्य सभी साधनों को स्थिर रखकर एक साधन में परिवर्तन का उत्पादन पर प्रभाव देखा जाता है।

 

प्रश्न 32. स्थिर लागत एवं परिवर्तनशील लागत में अन्तर स्पष्ट कीजिए। दोनों के दो - दो उदाहरण दीजिये।
अथवा 
स्थिर लागतों एवं परिवर्ती लागतों में अन्तर बताइए। 
उत्तर:
स्थिर लागते :

ये उत्पादन मात्रा पर निर्भर नहीं करती हैं। 

शून्य उत्पादन पर भी ये लागतें उठानी पड़ती हैं। 

स्थिर लागत वक्र क्षैतिज अक्ष के समानान्तर होता

अल्पकाल में स्थिर लागतों में कोई परिवर्तन नहीं किया जाता है। 

उदाहरण - भवनमशीनें।

परिवर्ती लागते: 

ये उत्पादन मात्रा पर निर्भर करती हैं। 

शून्य उत्पादन पर ये लागतें शून्य होती हैं। 

परिवर्ती लागत वक्र धनात्मक ढाल वाला वक्र होता है। 

अल्पकाल में परिवर्ती लागतों में परिवर्तन किया जा सकता है। 

उदाहरण - श्रमिककच्चा माल।

 

प्रश्न 33. उत्पादन किसे कहते हैं?
उत्तर:
उत्पादन वस्तुओं तथा सेवाओं की वह मात्रा है जो उत्पादक आगतों की विभिन्न मात्राओं का उपयोग कर उत्पादित करता है अर्थात् उत्पादनों के साधनों द्वारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं की मात्रा को उत्पादन कहा जाता है।

 

प्रश्न 34. अल्पकाल एवं दीर्घकाल में एक अन्तर बताइए।
उत्तर:
अल्पकाल वह समय अवधि होती है जिसमें उत्पादकउत्पादन की सभी आगतों में परिवर्तन नहीं कर सकता हैवह केवल परिवर्ती आगतों में ही परिवर्तन कर सकता है। इसके विपरीत दीर्घकाल वह समय अवधि होती है जिसमें उत्पादक सभी आगतों में परिवर्तन कर सकता

 

प्रश्न 35. स्थिर पैमाने के प्रतिफल तथा वर्धमान पैमाने के प्रतिफल में अन्तर बताइए।
उत्तर:
जब उत्पाद की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि होती हैउत्पादन में उसी अनुपात में वृद्धि होती है तो उसे स्थिर पैमाने के प्रतिफल कहते हैंजबकि जब उत्पादन की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि होती है तो उत्पादन में उससे अधिक अनुपात में वृद्धि होती है तो उसे वर्धमान पैमाने के प्रतिफल कहते हैं।

 

प्रश्न 36. वर्धमान पैमाने के प्रतिफल तथा ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल में अन्तर बताइए।
उत्तर:
जब उत्पादन की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि की जाती है तब निर्गत में उससे अधिक अनुपात में वृद्धि हो तो वर्धमान पैमाने के प्रतिफल कहा जाता हैजबकि उत्पादन की सभी आगतों में जिस अनुपात में वृद्धि की जाती है यदि निर्गत में उससे कम अनुपात में वृद्धि हो तो उसे ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल कहते हैं।

 

 

प्रश्न 37. औसत स्थिर लागत एवं औसत परिवर्ती लागत में अन्तर बताइए।
उत्तर:
कुल स्थिर लागत में निर्गत की इकाइयों का भाग देने से प्राप्त प्रति इकाई लागत को औसत लागत कहते हैं जबकि कुल परिवर्ती लागत में निर्गत की इकाइयों का भाग देने से प्राप्त प्रति इकाई लागत को औसत परिवर्ती लागत कहते हैं।

 

 

 

प्रश्न 38. प्रौद्योगिकी में सुधार का उत्पादन फलन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
एक उत्पादन फलनएक दी हुई प्रौद्योगिकी के लिए परिभाषित किया जाता है। यदि प्रौद्योगिकी में सुधार होता है तो विभिन्न आगत संयोगों में वृद्धि से प्राप्त होने वाले निर्गत के अधिकतम स्तरों को प्राप्त किया जा सकता हैइसके फलस्वरूप उत्पादन फलन में परिवर्तन होगा तथा हमें एक नया उत्पादन फलन प्राप्त होगा।

 

प्रश्न 39. समान मात्रा वक्र अथवा समोत्पाद वक्र का अर्थ बताइए तथा इसकी विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
समान मात्रा वक्र अथवा समोत्पाद वक्रसमोत्पाद वक्र दो उत्पादन साधनों के उन विभिन्न संयोगों को दर्शाता है जिनसे समान मात्रा में उत्पादन प्राप्त होता
समोत्पाद वक्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं।

समोत्पाद वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है।

समोत्पाद वक्र अपने मूल बिन्दु की ओर उन्नतोदर होता है।

समोत्पाद वक्र एक-दूसरे को काटते नहीं हैं।

ऊँचा समोत्पाद वक्र नीचे समोत्पाद वक्र की तुलना में अधिक उत्पादन को व्यक्त करता है।

 

 

प्रश्न 40. उत्पादक के संतुलन हेतु आवश्यक शती को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
साम्य के लिए आवश्यक शर्ते:

समोत्पत्ति वक्र संतुलन बिन्दु पर समलागत रेखा को स्पर्श करना चाहिए।

समोत्पत्ति वक्र व समलागत वक्र के ढाल संतुलन बिन्दु पर एक - दूसरे के बराबर होने चाहिए।

सन्तुलन बिन्दु पर समोत्पत्ति वक्र मूल्य बिन्दु के प्रति उन्नतोदर होना चाहिए।

 

 

प्रश्न 41. परिवर्ती अनुपातों के नियम के लागू होने का कारण बताइए।
उत्तर:
प्रारम्भ में कारक अनुपात उत्पादन के अनुकूल होने के कारण उत्पादन में वृद्धि होती है तथा एक विशेष स्तर के पश्चात् कारक अनुपात उत्पादन के लिए अनुपयुक्त हो जाता है जिस कारण परिवर्ती आगत का सीमान्त उत्पाद गिरने लगता है।

 

 

प्रश्न 52. कुल उत्पाद को रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कुल उत्पाद को रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है। प्रस्तुत रेखाचित्र में क्षैतिज अक्ष पर कारक 1 की मात्रा तथा लम्बवत् अक्ष पर निर्गत की मात्रा ली गई है। चित्रानुसार जैसे-जैसे आगत की मात्रा में वृद्धि की जाती है निर्गत की मात्रा में वृद्धि होती है।

 

 

 

 

निबन्धात्मक प्रश्न:

 

 

प्रश्न 1. उत्पादक तथा उत्पादन का अर्थ बताते हुएउत्पादन फलन के अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उत्पादक: उत्पादक वह साहसी व्यक्ति होता है जो उत्पादन के विभिन्न साधनों अर्थात् उत्पादन की आगतों का कुशलतम उपयोग करके वस्तुओं अथवा सेवाओं का उत्पादन करता है। दूसरे शब्दों मेंएक उत्पादक अथवा फर्म विभिन्न आगतों जैसे श्रममशीनभूमिकच्चा माल आदि को प्राप्त करता है तथा इन आगतों के मेल से वह निर्गत का उत्पादन करता है। उत्पादक को साहसी भी कहा जाता हैइसे उत्पादन के बदले लाभ की प्राप्ति होती है। 

 

उत्पादन: उत्पादनवस्तुओं अथवा सेवाओं की वह मात्रा होती है जो उत्पादकआगतों की विभिन्न मात्राओं का उपयोग करके उत्पादित करता है। जिस प्रक्रिया के द्वारा उत्पादक वस्तुओं अथवा सेवाओं का उत्पादन करता है उसे उत्पादन प्रक्रिया कहते हैं। अन्य शब्दों मेंउत्पादन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा आगतों को निर्गत में परिवर्तन किया जाता है।

 

उत्पादन फलन: किसी भी वस्तु के उत्पादन के लिए उत्पत्ति के विभिन्न साधनों जैसे श्रमपूँजीभूमिकच्चा माल आदि की आवश्यकता पड़ती है। जिस वस्तु का उत्पादन किया जाता है उसे उत्पादन कहते हैं तथा जिन साधनों के संयोग से उत्पादन किया जाता है उसे उत्पादन आगतें कहा जाता है। आगत तथा उत्पादन का सम्बन्ध तकनीकी ज्ञान के स्तर पर निर्भर करता है। एक दी हुई तकनीकी स्थिति में किसी फर्म के उत्पाद तथा आगतों के सम्बन्ध को उत्पादन फलन कहा जाता हैदूसरे शब्दों में आगतों एवं उत्पादन के फलनात्मक सम्बन्ध को उत्पादन फलन कहते हैं। उत्पादन फलन को गणितीय रूप में निम्न प्रकार लिखते है।
q= f (L, K) 
यहाँ q = उत्पादन की मात्रा, L = श्रम तथा K = पूँजी की मात्रा है। यहाँ q तथा उत्पादन के साधनों L  K में फलनात्मक सम्बन्ध है। यह फलनात्मक सम्बन्ध सकारात्मक है यदि उत्पादन के साधनों की मात्रा में वृद्धि की जाएगी तो उत्पादन की मात्रा में भी वृद्धि होगी। यदि उत्पादन के साधनों की मात्रा में कमी की जाएगी तो उत्पादन की मात्रा में भी कमी हो जाएगी।

 

प्रश्न 2. उपर्युक्त उदाहरण की सहायता से उत्पादन फलन की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एक उत्पादन फलनएक दी हुई प्रौद्योगिकी के लिए परिभाषित किया जाता है। यह प्रौद्योगिकीय ज्ञान है जो निर्गत के अधिकतम स्तरों को निर्धारित करता हैजिसका उत्पादन आगतों के विभिन्न संयोगों को उपयोग में लाकर किया जा सकता है। यदि प्रौद्योगिकी में सुधार होता हैतो विभिन्न आगत संयोगों में वृद्धि से प्राप्त होने वाले निर्गत के अधिकतम स्तरों को प्राप्त किया जा सकता है। तब हमें एक नवीन उत्पादन फलन प्राप्त होता है।
उत्पादन प्रक्रिया में फर्म जिन आगतों का उपयोग करती हैवे उत्पादन का कारक कहलाते हैं।

अपने - अपने निर्गत के उत्पादन के क्रम में एक फर्म कितने ही विभिन्न आगतों का प्रयोग कर सकती है। इस समय हम एक ऐसी फर्म पर विचार करेंगेजो केवल उत्पादन केकारकोंश्रम व पूंजी का प्रयोग कर निर्गत का उत्पादन करती है। अतः हमारा उत्पादन फलन इस बात को इंगित करता है कि इन दो कारकों के विभिन्न संयोग से निर्गत की कितनी अधिकतम मात्रा का उत्पादन किया जा सकता है। . हम उत्पादन फलन को इस प्रकार लिख सकते q= f (L, K) यह बताता है कि हम श्रम तथा पूँजी का प्रयोग कर. वस्तु की अधिकतम मात्रा q का उत्पादन कर सकते

तालिका : उत्पादन फलन

कारक

पूँजी

0

1

2

3

4

5

6

श्रम

0

1

2

3

4

5

6

0

0

0

0

0

0

0

0

1

3

7

0

2

3

3

0

0

7

8

4

9

0

7

8

6

7

3

5

4

6

0

8

3

1

7

0

0

2

9

6

6

8

0

3

3

0

7

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तालिका में उत्पादन फलन का एक संख्यात्मक उदाहरण दिया गया है। बायाँ कॉलम श्रम की मात्रा दर्शाता है तथा ऊपर की पंक्ति पूँजी की मात्रा दर्शाती है। जैसेजैसे हम किसी भी पंक्ति में दायीं तरफ जाते हैंपूँजी की मात्रा में वृद्धि होती है तथा जैसे-जैसे हम किसी भी कॉलम में नीचे की तरफ जाते हैं तो श्रम की मात्रा में वृद्धि होती है। दोनों कारकों के विभिन्न मानों के लिएतालिका तदनुरूप निर्गत स्तर दर्शाती है। उदाहरण के तौर परश्रम की 1 इकाई तथा पूँजी की 1 इकाई के साथ फर्म अधिक से अधिक निर्गत की 1 इकाईश्रम की 2 इकाई तथा पूँजी की 2 इकाई के साथ यह निर्गत की 10 इकाई काश्रम की 3 इकाई तथा पूंजी की 2 इकाई के साथ अधिक से अधिक निर्गत की 18 इकाई तथा इसी तरह से आगे भी उत्पादन किया जाता है।

 


 


 


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